बोध

मुंशी प्रेमचंद

बोध
(123)
पाठक संख्या − 4986
पढ़िए

सारांश

पंडित चंद्रधर ने अपर प्राइमरी में मुदर्रिसी तो कर ली थी, किन्तु सदा पछताया करते थे कि कहाँ से इस जंजाल में आ फँसे। यदि किसी अन्य विभाग में नौकर होते, तो अब तक हाथ में चार पैसे होते, आराम से जीवन ...
ashwini jaiswal
सज्जनता का फल अवश्य मिलता है
Mukesh Verma
अध्यापक का महत्व कभी कम नहीं हो सकता बशर्ते वह सच्चा अध्यापक हो ।
Iliyas Mirza
दिल जीत लिया
shalu sharma
बहुत ही सुंदर और बेजोड़ रचना। प्रेमचंद जी को शत शत नमन।। 🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻⭐⭐⭐⭐⭐
Ramesh Chandra
aasha se pare bahut hi aachi kahani.
Rajni Gupta
👌👌👌👌👌
सारी टिप्पणियाँ देखें
hindi@pratilipi.com
080 41710149
सोशल मीडिया पर हमें फॉलो करें।
     

हमारे बारे में
हमारे साथ काम करें
गोपनीयता नीति
सेवा की शर्तें
© 2017 Nasadiya Tech. Pvt. Ltd.