बोध

मुंशी प्रेमचंद

बोध
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सारांश

पंडित चंद्रधर ने अपर प्राइमरी में मुदर्रिसी तो कर ली थी, किन्तु सदा पछताया करते थे कि कहाँ से इस जंजाल में आ फँसे। यदि किसी अन्य विभाग में नौकर होते, तो अब तक हाथ में चार पैसे होते, आराम से जीवन ...
Pratima Saini
apne kam ko hi sarvshreshth samjho dusre ki thali mai na jhankoo
ashwini jaiswal
सज्जनता का फल अवश्य मिलता है
Mukesh Verma
अध्यापक का महत्व कभी कम नहीं हो सकता बशर्ते वह सच्चा अध्यापक हो ।
Iliyas Mirza
दिल जीत लिया
shalu sharma
बहुत ही सुंदर और बेजोड़ रचना। प्रेमचंद जी को शत शत नमन।। 🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻⭐⭐⭐⭐⭐
Ramesh Chandra
aasha se pare bahut hi aachi kahani.
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