बैसाखियाँ

पवित्रा अग्रवाल

बैसाखियाँ
(188)
पाठक संख्या − 10199
पढ़िए

सारांश

आजकल मणि बहुत परेशान रहने लगी है .घर की छोटी छोटी बातें उसे आहत कर जाती हैं .रात को ठीक से सो नहीं पाती .अक्सर उसे नींद की गोली खानी पड़ती है .उसने महसूस किया है कि दिन पर दिन वह असहिष्णु होती जा रही ...
anjali subhash
बहुत ही अच्छा लिखा है आपने,,,,,,,,,,,,,,,,,,, थोड़ा और लिख देती,,,,,,,,,,,,✍️अभी भाग 2 लिख सकती है ,,,,पढ़ने की इच्छा है.. .......कहानी हिर्दय स्पेर्शी है👏👏👏👏👏👏👏👏👏👏👏👏👏👏👏👏👏👏👏👏👏👏👏👏👏👏
Jiwan Gupta
अति सुंदर कहानी। लड़की की समझदारी का बहुत सटीक चित्रण किया गया है
Gurdeep Kaur
bauht acha faisla liya manni ne
Dr Ravi Shankar Singh
कहानी थोड़ा और लिखना था
Biji Jojen
bahut achchi kahani....
Renu Vijh
अंत कुछ अपूर्ण सा है
सारी टिप्पणियाँ देखें
hindi@pratilipi.com
080 41710149
सोशल मीडिया पर हमें फॉलो करें।
     

हमारे बारे में
हमारे साथ काम करें
गोपनीयता नीति
सेवा की शर्तें
© 2017 Nasadiya Tech. Pvt. Ltd.