बैसाखियाँ

पवित्रा अग्रवाल

बैसाखियाँ
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सारांश

आजकल मणि बहुत परेशान रहने लगी है .घर की छोटी छोटी बातें उसे आहत कर जाती हैं .रात को ठीक से सो नहीं पाती .अक्सर उसे नींद की गोली खानी पड़ती है .उसने महसूस किया है कि दिन पर दिन वह असहिष्णु होती जा रही ...
Dr Ravi Shankar Singh
कहानी थोड़ा और लिखना था
Biji Jojen
bahut achchi kahani....
Renu Vijh
अंत कुछ अपूर्ण सा है
Kundan Sinha
कहानी तो बहुत बढ़िया जा रही थी पर अंत और अच्छा होना चाहिये था।
दीपा
bht sundar kahani.. aaj ke katu satya ko ujagar krti hui
Bhavana Sagar
ये बड़ी अजीब विडंबना है कि हम अपने माँ बाप के साथ सहारे की बात सोचते हैं पर वही सहारा माँ बाप समान सास ससुर को नहीं देना चाहते।
Sunita Tiwari
Ek achchi n marmik rachna
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