बैचेनी

Himanshu raghav

बैचेनी
(28)
पाठक संख्या − 95
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सारांश

आज कुछ अच्छा नहीं लग रहा है पता नहीं मन मे कुछ चल रहा है । कहना चाहता हूं पर कह नहीं पा रहा हूं ।। कुछ अजीब  सी बैचेनी है कभी रो रहा हूं फिर कभी हसनें लगता हूं।  असल में क्या है कि मुझे  प्यार हुआ है ...
Uma Vaishnav
कुछ जज्बात शब्दों से बया नहीं होते..... सिर्फ महसूस ही किये जाते हैं......... सुंदर रचना 👌
Poonam Kaparwan
sundar ye bechaani v jindgi ke aandrunni pan no ko khholti h .nice 👍
Vinay Anand
लाजवाब लेखन
Sudhir Kumar Sharma
अद्भुत
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Tanu Mishta
इतना दर्द???? बहुत अच्छे से जाहिर किया हु
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Neha Mishra
nice
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Shobhna Goyal
मन की बेचैनी का सुंदर शब्दों में संयोजन !!!👌👌👌👌
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प्रद्युम्न ✍️
रिलेक्स यार
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Nikita Yadav
बेचेनी कहकर जाहीर नहीं हो पाती उसे शब्दों में उतारा जा सकता है
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Neetu Sen
तुम दूर जाओ तो बेचैनी मुझे ही होती हैं,महसूस करके देखो मोहब्बत ऐसी ही होती हैं....
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