बेवक़ूफ़ गृहणी

Rekha Sharma

बेवक़ूफ़ गृहणी
(67)
पाठक संख्या − 5987
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सारांश

एक गृहणी वो रोज़ाना की तरह आज फिर इश्वर का नाम लेकर उठी थी । किचन में आई और चूल्हे पर चाय का पानी चढ़ाया। फिर बच्चों को नींद से जगाया ताकि वे स्कूल के लिए तैयार हो सकें । कुछ ही पलों मे वो अपने  सास ...
Anuradha Narde
bahut hi achi. kuch bhi karlo housewife ki Kahi bhi kadra nahi
मनु
बहुत खुब
T R Garg
Haa shi kaha mujha bhi lgta h mom h jo sb smbl kr rakhti h fir bhi hm care nhi krta
sugandh yadav
bahut sahi bat..... tb hi log bebkoof khte hain...
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Shikha Mishra
subha 5 bje se raat ke 11 bje tak lge raho...phir v sab ek hi baat bolte h....din bhar ghar me reh ke krti kya ho....
Rajesh Sehgal
लेखक का नाम भी देना चाहिये. कहानी बहुत पसन्द आयी
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