बेबसी की तड़प

अरविन्द सिन्हा

बेबसी की तड़प
(6)
पाठक संख्या − 72
पढ़िए

सारांश

सोचा था अपने बलबूते खूब ऊडूंगा , फर्श से अर्श पर पहुंच जाऊंगा । जो कोई ना कर सका,  वह भी करके दिखाऊंगा अपने सपनों को आकार देकर, एक खुशनुमा दुनिया बसाऊंगा । पर वाह रे मेरे शरीर ,तूने ही मेरा साथ न ...
Pragya Bajpai
बहुत खूब।
Palak Srivastava
अतिउत्तम
Bhavana Bhavana
hridaya sparshi. sach hi kaha dehabhimaan nirarthak hai .
hindi@pratilipi.com
080 41710149
सोशल मीडिया पर हमें फॉलो करें।
     

हमारे बारे में
हमारे साथ काम करें
गोपनीयता नीति
सेवा की शर्तें
© 2017 Nasadiya Tech. Pvt. Ltd.