बेबसी # ओवुमनिया

Damini

बेबसी  # ओवुमनिया
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पाठक संख्या − 758
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सारांश

बेबसी पिछले 10 दिन से अम्मा बुखार में पड़ी थी। चार दिन से तो अन्न का एक दाना भी उसके मुंह में नहीं गया था। गई रात पड़ोस से काकी ने आकर दूध की चन्द बूदें चम्मच से डालने की कोशिश की पर एक भी बूँद मुंह ...
Kalpana Chauhan
very nice
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Beena Awasthi
आप बहुत अच्छा लिखती हैं, ईश्वर करे आपके लेखन में हमेशा निखार आता रहे।
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स्वाती श्रीरामे
ना चाहते हुए भी उस नर्क में जीने की " बेबसी " को दर्शाती हुई मार्मिक एवं ह्रिदय स्पर्शी रचना ... 😒 😒 beautiful narration ...👌 👌todays reality ......
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Mickenzy Titus
कड़वा सच है और मार्मिक चित्रण
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ईशा अग्रवाल
समाज के कड़वे सच को सामने लाती कहानी।
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Utkarsh Mishra
😯😯
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Sudhir Kumar Sharma
अद्भुत. मार्मिक
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Kiran Singh
दामिनी कैसे लिख लेती हो समाज मे फैली विद्रूपता को ऐसी विषम जिंदगी का सत्य जहाँ शराब जिंदगियों को लील जाती निशाना बन जाते है मासूम और जूझने लगते हैं उनका बचपन कहीं खो जाता है।ऐसा सत्य जो बास्तव कहीं घट रहा होता है।
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Pramod Ranjan Kukreti
कटु सत्य को उजागर करती रचना । किसी को भी भावुक करने में सक्षम कहानी । चंद शब्दों में,गहन पीड़ा को उकेरती रचना ।
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