बेटी

Anu Shukla

बेटी
(69)
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सारांश

लक्ष्मी
Jetharam Jaat
जिस घर मे बेटी का जन्म होता है उस घर का ही सारा पाप धुल जाता है
सुखचैन मेहरा
भाव बहुत अच्छे लगे आ0 ऐसी बेटियों को तरसते है लोग जिनके बेटियां नहीं होती। बेटियों की अच्छी परवरिश का ही नतीजा है कि बेटियां माँ-बाप इज्जत को अपने हाथों से चार चांद लगा देती है। बहुत ही अच्छा लगा एक बहुत अच्छी व होनहार बेटी की कहानी पढ़कर। मेरी कोई बहन नहीं है हमें पता है कि बेटी, बहन क्या होती है जब पड़ोस में रहने वाली बेटियां अपनी मर्जी से राखी बांधती है या किसी कारण से नहीं बांध पाती तो थोड़ा सा भी अच्छा नहीं लगता है। कई बार तो हाथ सुन्ने रह जाते है राखी के दिन बाद दुख होता कि हमारे घर भी एक लक्ष्मी पैदा होती । लोगों की सोच आज कल बहुत नीचे गिर गई है। कहते है अच्छा है आपके कोई बेटी नहीं है....अरे! हमारे रक्षाबंधन वाले दिन कभी सुन्ने हाथों से पूछ कर देखना कभी बेटी, बहन क्या होती है। लोग पूछने पर उत्तर देते है....बड़ी हो कर माँ बाप की इज्जत को उछाल देती है। अरे! यदि आपकी परवरिश में कोई कमी नही है तो इनको आप खुला छोड़ सकते हो इन चिड़ियों को खुले आसमान में उड़ान भरने दे सकते हो। ये उड़कर आपके पास ही वापस आएंगी।
Satpal. Singh Jattan
nice punctuation ka dhiyan the ji.Vichar aapke achhe lagte Hain.or achha likho.kahani likho.
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Naresh Gujjar
लाजवाब
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SHAILENDRA DUBEY
हृदयस्पर्शी!!!
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शैलेश सिंह
भाव बहुत अच्छे है, शब्द भी। बहुत सुंदर है आपकी रचना,, अगर पढ़नेवाला अच्छे से पढ़े,, अन्यथा आपको थोड़ा पंक्तियों, पूर्णविराम,कोमा, पर ध्यान देना होगा।।
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मृण्मयी डोईजोडे
बेटी है तो रोटी है प्यार है जिनकी बेटिया होती है उनसे अच्छा खुशनसीब कोई नही होता हैं
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Vikrant Madhale
Sachai ahi hai
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Kumar Ayush
wah achha h
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Gamvir gagan
अच्छा लगा। सुंदर रचना के लिए आपको धन्यवाद।
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