बेटी एक माँ

अलका श्रीवास्तव

बेटी एक माँ
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सारांश

खनाक!!! किचन से कप टूटने की आवाज आई अनामिका भागते हूए किचन में पंहुची। सामने रोज़ी सिर झुकाए खड़ी थी। अनामिका उसके ऊपर बरस पड़ी, "एक काम भी सही से नहीं कर सकती। टी सेट खराब कर दिया। मालुम है कितना ...
हरमन बराड़
👌👌👌 बेहतरीन
𝕧𝕚𝕛𝕒𝕪 ⓢⓞ-ⓛⓤⓒⓚⓨ
शायद हम पुरुष वर्ग इस पिडा को समझ ने में असमर्थ हैं!! सुंदर रचना
Mithilesh Kumari
स्वाभाविक एवं मनोवैज्ञानिक चित्रण द्वारा रिस्ते की अहमियत दर्शाया गया है।
Sonu Rawat
बहुत सुंदर कहानी पड़ के बहुत अच्छा लगा एक नई ऊर्जा का आभास हुवा वास्तव में सहारा ही हर किसी मनुष्य को सशक्त बनाता है
Dr Deepayan Choudhury
कथानक एवं शब्दों का चयन अति उत्तम है ,साधुवाद
कीर्ति प्रकाश
बहुत खूबसूरत रचना और नारी जीवन का यथार्थ भी..
Archana Varshney
बहुत बढ़िया
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