बेटियां ख़्वाब देखती हैं

एम डी. नासिर..

बेटियां ख़्वाब देखती हैं
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सारांश

यह कविता कठुआ गैंगरेप में दुनिया को अलविदा कहने वाली नन्ही परी "असिफ़ा" को समर्पित है।
Er Gufran Alam
जिस आंगन में बेटी नहीं होती वह आंगन सुनसान रहता है। और जिस आंगन में बेटी होती है वह खुशियों से भरा होता है बहिन बेटी किसी कि हो उसे अपनी ही बहिन बेटी मानना चाहिए जब हम सभी ऐसा करेगे तो दूसरे भी इज्जत करेगे। मैंने अगर गलत कहा हो तो माफ़ करना। धन्यवाद
Natakwala
बहुत अच्छी कविता...दिल को छूने वाली... धन्यवाद आपका
Amit Saini
संवेनशील।
Kanti Kumari
Impressive👌👌
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Meera Sajwan
अत्यंत मार्मिक!!@
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Sayyeda Khatoon
बेटियाँ ख़्वाब देखती हैं बेहतरीन भावाभिव्यक्ति ।बहौत बहौत बधाई सर।
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