बेज़ुबान दोस्‍त

बेज़ुबान दोस्‍त
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सारांश

पापा का दूसरे शहर में ट्रांसफ़र हो गया था। आज शाम को हमें ट्रेन से निकलना था। शाम को ट्रेन के इन्‍तज़ार में हम रेलवे स्‍टेशन पर खड़े थे। माँ मुझे उदास देखकर चिन्तित थी। मेरी निगाहें किसी को ढूंढ रही ...
Balwant Bhandari
आप और आपकी लेखनी की विषयवस्तु मार्गदर्शन करती है।
Vivek Malik
वाह, आपकी कहानी दिल को छू गई।
अजयराज शेखावत
बहुत अच्छा लिखा है
कुलदीप सिंह हुडडा
हृदयस्पर्शी कहानी लिखी है आपने ..पढ कर अच्छा लगा..
Sunil Kumar Sunil Kumar
बहुत सुंदर
satyam mishra
बहुत ही भावनात्मक कहानी। कृपया मेरी रचनाये भी पढ़े और प्रतिक्रिया दें।
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shravan
Bahut hi achhi line
Satyam Mishra
अत्यंत भावुक करने वाली कहानी
मुकुल सिंह
आप की तीनो रचनाओं को पढ़ा अच्छा लगा । समय के साथ आप और अच्छा लिखेंगे।
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