बीस हजारी

प्रीति श्रीवास्तव

बीस हजारी
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सारांश

रोटी सेंकते ही चंपा बुदबुदा उठी बीस हजारी यही तो नाम था उसका।वह थाली मे दो रोटी अनमने से टुंगते अतीत के पन्ने उलटने लगी कितने अरमानो को सहेजे वह पति के साथ ससुराल राजस्थान के गावँ में आई थी।एक छोटा ...
Sunita Veer
Kahani to achhi hai per hindi me bahut galtiya hai
धर्मेंद्र विश्वकर्मा
जब हद से बढ़ जाए सितम.. तो उठाना ही पड़ते हैं ऐसे कदम.......
Veena Jha
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