बीते हुए वो दिन

SHAILENDRA DUBEY

बीते हुए वो दिन
(17)
पाठक संख्या − 769
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सारांश

चतुर्थ भाग: अब हम घनिष्ठ मित्र थे
Nittu kumar
ओह! सुखद उच्छ्वास! बहुत शानदार लेखन है आपका👌👌👌 हर बिधा पर उतनी ही कमाल चलती ह आपकीं कलम👏👏👏👏 सशक्त लेखन की श्रेणी में ऐसे लेखन गिने जाते हैं। कहीं कहीं वर्तनी या टंकण त्रुटियाँ हैं ।परन्तु इतनी प्रवाह और रोचकता लिए कहानी पाठक के लिए इन त्रुटियों को अनदेखा करने के लिए काफी है। इतनी सरल,सहज और विशिष्ट भाषा व शैली रचनाकार की प्रतिभा की गवाही देती है👏👏👏👏👏🙏🙏🙏 अति सुंदर👌👌 लगता है कहानी पढ़ी नही बल्कि हम भी साथ साथ चलते आप दोनों की सारी हरकते देख रहे थे।परिवेश का गज़ब चित्रांकन पात्रों और घटनाओं के साथ पाठक को जोड़ देता है। बधाई स्वीकारिये!👏👏👏👏👏🙏⭐⭐⭐⭐
Vanita Handa
बढ़िया अगली किस्त का इंतजार रहेगा।
Yogita Garg
बहुत ही खूबसूरत रचना। भाषा । शैली। बढ़िया
Asha Shukla
शानदार ,रोचक ,कहानी।
Abhilasha Chauhan
बेहतरीन रचना
मंजुबाला
रोचक और बेहतरीन
Neera Thakur
लाजवाब महोदय
R.K shrivastava
बहुत अच्छी कहानी है । बचपन की बातें, लगती सुहानी !
Dr. Santosh Chahar
बहुत बढिया कहानी। मजबूत दोस्ती। सशक्त लेखन।
Sushma Naithani
दो दोस्त एक दूसरे के प्रति समर्पित।
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