बिछिया

अजय अमिताभ सुमन

बिछिया
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सारांश

कभी कभी किसी व्यक्ति अनजाने में ऐसी गलतियाँ हो जाती है , जिसकी माफ़ी मिलनी असंभव होती है . ये कहानी इस तरह की एक घटना पे आधारित है, जहाँ पे एक बालक से अनजाने में भूल हो जाती है . वो भूल ऐसी है जिसके बहुत हीं दूरगामी परिणाम होते है. हालाँकि इसमें बालक की कोई गलती नहीं है फिर परिणाम के कारण से उसके मन में अपराध भाव जागृत हो जाती है , जो ताउम्र उसे परेशान करती है.
रविप्रताप राय
बहुत सुन्दर प्रस्तुति है आपकी, एक सम्वेदनशील सोच है ये ''बिछिया"
Shaline Gupta
best👍👍👌👌💐💐😊😊
Pramila Joshi
बहुत ही सही कहानी घर में कुछ भो न दिखे पहला शक सेविका पर।आपका बहुत,बहुत आभार इस प्रकार की सुन्दर रचना के लिये।
Madhurising Singh
मार्मिक रचना
Anurag Sharma
aaj k time jayda hota h ......kyuki way of thinking totally change ...
babita Gupta
बेहतरीन रचना
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