बाहर वाली क़ब्रें

कमल जीत सिंह

बाहर वाली क़ब्रें
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सारांश

‘‘ये पुराने जमाने के राजा-महाराजा अपने किलों के मुख्य द्वार का रास्ता ऐसा टेढ़ा-मेढ़ा क्यों बनाते थे ? आजकल तो प्रवेश के रास्ते कितने सुन्दर, चौड़े और सीधे होते हैं।’’ ‘‘ इस एन्टरेंस, मेरा मतलब है, ...
Meena Sundriyal
very nice story. Aankho dekha haal lag Raha tha
Hema Ingle
वाह ! बेहतरीन लिखा है, नायाब कोशिश... आज के हालात को समझाने की पुरजोर कोशिश की है। Salute
Kavi Kaushik
शब्द नहीं मिल रहे क्या कहे!👌👍👏💐
Avinash Sharma
bahut achhi kahani,wahh.mza aa gya pdkr
Davinder Kumar
पढ़ कर वास्तविकता का अनुभव हुआ और मजा आया
Divana dipak Dildar
is kahani ka dusra bhaag lao
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