बाल दिवस

एकता सारदा

बाल दिवस
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सारांश

ये लो नये कपड़े और कल जल्दी उठकर तैयार हो जाना तुम्है मेरे साथ चलना है।एक पैकेट छोटू की तरफ फैंकते हुऐ संगीता देवी ने कहा। संगीता देवी एक समाज सेविका थी और कल उन्हें बाल दिवस पर एक सभा को संबोधित ...
Atul Kumar Singh
आपकी छोटी छोटी कहानियां दिल को छूती हैं और समाज की आर्थिक विषमताओं से लड़ने के बदले आप कुछ ले दे कर समाधान ढूंढ़ लेती हैं बस अब इन बच्चों को पढ़ाने का बीड़ा उठा लीजिए। ये संपन्न हो जाएंगे तो समस्या समाप्त।
Mala Sinha
अच्छी सोचहै
Ajnish Verma
all are the best stories.
पंचदेव कुमार
सभी रचनाएं अच्छी लगी ।
Kamlesh Singh
bahut achchhi kahaniyan
pramod verma
बहुत सुंदर रचना
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