बाबूजी की वापसी

रिवेश प्रताप सिंह

बाबूजी की वापसी
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सारांश

चितरंजन शर्मा आधुनिक युग के श्रवण कुमार थे. उनकी माता जी बचपन में ही स्वर्ग सिधार गयी थी. तब वे इतने छोटे थे, कि उन्हें अपनी माँ की कोई बात याद ही नहीं. मातृहीन चितरंजन शर्मा को उनके पिता का भरपूर ...
Ravi
bhut hi sundar kahani bachpan lauta diya aapne bhut bhut dhanyawad🙏
ashwini jaiswal
bahut sunder aur marmik
Meena Bhatt.
रिवेश जी बहुत सुंदर कल्पना।पत्नी के द्वारा एक कटु सच कहलवाया आप ने।आत्मा के द्वारा पैर न छू आना दिल को छू गया।हार्दिक शुभकामनाएं।
Archana Varshney
बहुत अच्छी
Vikash Kumar
kya lika hai... gajab.
Vikas Bansal
बहुत ही जानदार और शानदार कहानी है
Mary Menan Bodra
आप की यह कहानी पढ़ कर बहुत रोयी। अपनी मां की याद आ‌ फिर आ गई। अक्सर मैं मां से अपने आप में ही बातें करती हूं। मैंने मां को पैर छुकर विदा किया। अब चार साल हो रहे हैं ,पर मां की याद नहीं जाती।
Sandy Honey
Adhbhut rachna..........
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