बादल के उस पार

शशि पाण्डेय

बादल के उस पार
(60)
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सारांश

सुलक्षणा पंचतत्व मे विलीन हो रही थी। आग की लपटों ने उसको अपने आग़ोश मे ले लिया था । उसके जलने के साथ ही उसके और अमोल के सपने भी धू-धू कर पंचतत्व मे धुआँ हो रहे थे । इतना बड़ा दुख कोइ कैसे सहन कर पाता ...
Reena singh
दिल को भेदने बाली कहानी
vikash kumar
बहुत ही सुन्दर रचना है लिखी है आपने सर thank you👌👌👌👌🌹🌹🌹🌹
Ansh Kumar
बहुत अच्छे हैं
Karm
bhot andar tk mehsos hoyi
ASHISH MEGASH SINGH
बेहद उम्दा...👌
Sayam Bihari
छोटी खुबसूरत रचना।प्रसंसनीय प्रयास ।भावनाओं की प्रस्तुति में थोड़ी धार का प्रवाह आवश्यक ।अच्छा है।धन्यवाद
Ashok Upadhyay
I deeply touched the thoughts .your thoughts for us to rely on the heart touching feelings and valuable sentiment expressed .
Gaurav Shukla
आपके लेख काफी सराहनीय हैं।
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