बादल के उस पार

शशि पाण्डेय

बादल के उस पार
(63)
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सारांश

सुलक्षणा पंचतत्व मे विलीन हो रही थी। आग की लपटों ने उसको अपने आग़ोश मे ले लिया था । उसके जलने के साथ ही उसके और अमोल के सपने भी धू-धू कर पंचतत्व मे धुआँ हो रहे थे । इतना बड़ा दुख कोइ कैसे सहन कर पाता ...
Mudita Mishra
deeply touched but too short
Reena singh
दिल को भेदने बाली कहानी
vikash kumar
बहुत ही सुन्दर रचना है लिखी है आपने सर thank you👌👌👌👌🌹🌹🌹🌹
Ansh Kumar
बहुत अच्छे हैं
Karm
bhot andar tk mehsos hoyi
ASHISH MEGASH SINGH
बेहद उम्दा...👌
Sayam Bihari
छोटी खुबसूरत रचना।प्रसंसनीय प्रयास ।भावनाओं की प्रस्तुति में थोड़ी धार का प्रवाह आवश्यक ।अच्छा है।धन्यवाद
Ashok Upadhyay
I deeply touched the thoughts .your thoughts for us to rely on the heart touching feelings and valuable sentiment expressed .
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