बहादुर बेटी

प्रीति राजपूत शर्मा

बहादुर बेटी
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सारांश

आज एक साल पूरा हो गया ।आज फिर से वही सब होगा पंडित जी आएंगे ,हवन करेंगे ,फिर वही सारा खाना बनेगा,एक भी चीज़ बदलनी नहीं चाहिए पंडित जी ने पहले ही कह दिया था ।परिधि ने सारा काम हाथों पे उठा रखा था बाकि ...
Kp Singh
no words to say more
Sheetal Kumari
बहुत ही मार्मिक पढ़कर आंखो में आशु आ गए
Juhi Khanam
सही कहा आपने हर बेटी का पहला प्यार उसके पापा ही होते हैं। मेरी तो यही दुआ है कि सब बेटियो के सर पर उनके माँ बाप का साया सलामत रहे।
Deepak Sharma
मै समझ नही पाया कि क्या कहुँ आखों मे आसु है और होठ बिलकुल शान्त,
Keya Jaisal
हृदयस्पर्शी रचना,मन भीग गया ।
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