बस का सफर

शालिनी पंकज

बस का सफर
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सारांश

"बस का सफर" ★★★★★★ आज मैं अंतिम सीट में बैठी थी,जबकि पूरी बस खाली थी।पर सन्तुष्टि थी की आज का सफ़र ठीक से कटे।करीब 5 -10 मिनट में धीरे धीरे पूरी बस भर गई।ड्राइवर अपनी सीट में बैठा।और बस आगे बढ़ गयी।मैं ...
Dhani Vyas
बिल्कुल सही कहा आपने। एक लड़की ही ग़लत नज़र पढ़ सकती है-जिसे इग्नोर न करके सावधान रहना चाहिए। हर जगह लड़ना जरूरी नहीं है मन की मजबूती बहुत ज़रूरी है।
Prashant
सही बात कही है
akhil aggarwal
aapne iski recording karke complaint q nhi ki??
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