बवंडर

अरविन्द कुमार खेड़े

बवंडर
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सारांश

समय बदला तो अब बहुत कुछ बदल गया है । आज उसकी हैसियत एक फोकटिया से ज्यादा कुछ नहीं । जिसे अपमानित करने के उद्देष्य से आम भाषा में ‘‘काम का न काज का, दुष्मन अनाज का’’ कहा जाता है । बेमतलब का । लेकिन ...
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