बलात्कार पर सहमति

रुचिका मेहता

बलात्कार पर सहमति
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सारांश

बलात्कार पर सहमति मत दीजिये, अपनी सोच बदलिए और बच्चो को सही- गलत का फर्क बताइये.
ajay Chandravanshi
संस्कार! आज के ज़माने में संस्कार तो मोबाइल, यूट्यूब, इंटरनेट,फिल्मे,गाने, यही सब सीखा रहे हैं।
shalu choudhary
bilkul sahi.. meri kahani suraksha ghar k andar padhiyega.
Avantika
apki bat se agrry krti hu mam kuki ladkiyo ko hi roka jata h har baat k liy jabki ladko ko to khulli azadi h fir chahe vo kuch bhi kre me sbhi parents se yahi kehna chahti hu ki jtni rok tok ap apni beti pr lgate h utni hi Apne beto pr bhi lgana sikhiye kuki kya pta kl apki hi beti k sath Bhagwan na kre kuch galat ho jye
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Sarojanand Jha
Good Thoughts Like d.
इन्द्र प्रताप यादव 'मनीष'
मैं आपके कहानी की सराहना करता हूँ, पर मैं चाहता हूँ कि एक बार आप मेरी कहानी 'चिराग तले अंधेरा' जरूर पढ़े
Akhil
galti dono ki hoti h madm ji
Amit Saini
बिल्कुल सही कहा ,,,
supriya mishra
Very helpful books for books readers
अमित शर्मा
श्रमा चाहूँगा, परंतू औरतों को स्वयं को बदलना होगा, जो कुछ हमारे दकियानूसी संस्कारों के नाम पर औरतों को चुप चाप सहने के लिऐ उन्ही की बङी- बुढ़ी औरतों द्वारा बचपन से सिखाया जाता है सरासर गलत है। और जहाँ तक लङकों की बात है उन्हें बचपन से ही लङकियों की इज्जत करना सिखाना पङेगा अगर बचपन से लङकों को संस्कार दिऐ जाऐं तो समाज बदलने में ज्यादा सहयोग होगा।
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