बर्फ की सिल

रामप्रकाश वरमा

बर्फ की सिल
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सारांश

मेरे बगल मंे लेटी हुई औरत के बदन पर तार भी नहीं था उसके जिस्म की गर्माहट में झुलसते हुए तमाम वक्त मेरे हाथों से फिसल चुका था, आज उसका वही बदन किसी बर्फ की सिल की तरह ठंडा लग रहा था। एहसास हो रहा था, ...
Rachna Goel
very beautiful story. औरत अपना मन मार कर सारे घर की जरुरते पूरी करती है,लेकिन उस के मन को कोई नही समझता।
Ajit
dishaheen kahani
अटल पांडेय
to kya bhai sarala mar gai . kahani pura sahityik hai please thoda saral likhen pr bht sundar rachna andar tak ghusana padega
विजेता राठौर
बढ़िया अर्थपूर्ण कहानी ...
Jyoti Sharma
बेकार
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