बरसात में खौफ

इरा टाक

बरसात में खौफ
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सारांश

बच्चे खेलने लगते हैं, पति घर के कोने में बनी बार से शराब पीने लगता है और औरत फ्रिज में खाने का सामान ढूढने को जैसे ही उसका दरवाज़ा खोलती है , जोर से चीख पड़ती है। फ्रिज में कटे हुए सिर, हाथ पैर रखे हुए थे। निशा वहीँ पहुँच गयी थी जैसे ! एकदम उसने तेज़ ब्रेक लगाया।
Santosh Bastiya
शब्द नही है तारीफ के, बहुत बढ़िया। कृपया मेरी रचना 'अंधेरो के साये' जरूर पढ़ें ।और अपना मूल्यवान समीक्षा जरूर दें।
शोभा शर्मा
वाह,बहुत अच्छा ताना वाना कहानी का .
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