फेसबुक की दुनिया

Kumar durgesh Vikshipt *Vaishnav*

फेसबुक की दुनिया
(23)
पाठक संख्या − 119
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सारांश

फेसबुक की दुनिया कुमार दुर्गेश "विक्षिप्त" उस देर रात की बात, ना था, कोई मेरे साथ, (सिर्फ मोबाइल था मेरे हाथ) मैंनें जैसे ही चालू किया फोन, वो मिल गई फेसबुक चेट ऑन, अँजुरी कॉप रही थी, मेरा लिखा जो वो ...
Sma Sma
ha ha ha,nice andd true
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Pragati Devanshi
bahut achchha likha h aapne...
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Vijay Kumar Soni
वाह। अच्छा है
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Raksha Thakur
😊☺👌
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Asha Shukla
very nice and beautiful poem.
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Satpal. Singh Jattan
yaar AAP me kuchh baat h . very nice and interesting
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रविंद्री चौधरी
😄😄😄 क्या लिखते हैं आप .. वाह ..!!
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PA Jain
यही सच है
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