फूल खिलना बाकी है

अतुल कुमार पाण्डेय

फूल खिलना बाकी है
(193)
पाठक संख्या − 11741
पढ़िए

सारांश

ग्यारह जनवरी थी जब मैं अमन से पहली बार मिली थी. बहुत सौम्य और सुन्दर चेहरा था उसका. दुनिया के छल-कपट से बहुत दूर था उसका निर्मल मन. बिलकुल वैसा ही था जैसा मेरे सपनों का राजकुमार था. मैं तो दीदी से मिलने गई थी, क्या पता था कि अपना दिल किसी के पास छोड़कर चली आऊंगी. और क्या पता था कि मेरा दिल लिए वह संसार से विदा हो जायेगा.
Punya Juneja
बहुत सुंदर लिखा है। छोटे छोटे किस्से बीच में अच्छे हैं पर जुड़े हुए नही हैं। प्रयास करें कि कहानी एक लय में चले।
mili
no words... awesome story... but I think end tragic na hota to Aur achchi story banti
ravindra singh
अंत और अच्छा हो सकता था
Rekha singh
कभी-कभी यादे ही जीवन बन जाती है
Alok Bhakt
Rula dia.....pyar bahut dukh deta h
Sapana Singh
woww....very heart touching story
सारी टिप्पणियाँ देखें
hindi@pratilipi.com
080 41710149
सोशल मीडिया पर हमें फॉलो करें।
     

हमारे बारे में
हमारे साथ काम करें
गोपनीयता नीति
सेवा की शर्तें
© 2017 Nasadiya Tech. Pvt. Ltd.