'फिर कब मिलोगी'

प्रीति श्रीवास्तव

'फिर कब मिलोगी'
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सारांश

रेशमा के ऑफिस के नीचे उसे उतार कर मशाल ने बाइक स्टार्ट करते हुये पूछा -फिर कब मिलोगी एक घरघराता आवाज सुनाई दिया 'बहुत जल्द' अचानक मशाल मुड़ कर रेशमा के तरफ देखा और वह............!!
Vikas Anuragi
bahoot badhiya kahani
दिनेश दिवाकर
ओह मैं तो एक बार डर ही गया था कहानी बहुत सुंदर था लेकिन मशाल और डीम्पी नाम मजा नहीं आया
devendra methri
om namaha shuivay.... nice story..
Falguni Doshi
यही story ki भूत प्रेत वाला रूप न देकर और अच्छे से लिखती तो और मजा आता । थीम बहुत बढ़िया था ।
Rani Priya
bahut hi Sundar aur hirdaay bidarak kahani he😔
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