प्रेम

रितेश कुमार सक्सेना

प्रेम
(9)
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सारांश

तुमको पाने की चाहत में मैं खुद को खोता गया, मैं तेरा नहीं अजनबी खुद का होता गया तू रोक न ले कहीं खुद को इसलिए मैं अंदर ही अंदर रोता गया तेरी मजबूरियों को सोचकर मैं खुद को कोस्ता गया मैं तुझे ...
Shreya Chaturvedi
bahut sundar rachna 👌💐💐
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अनिता तोमर
विरह वेदना को स्वयं में समेटे बेहतरीन रचना.....💐💐
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Kanti Kumari
उम्दा👌👌
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Damini
बहुत खूब
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Rekha kumari verma
good
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Nita Shukla Dubey
वाह ...
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Lalita Vimee
ये शहर भी मुझ से खफा होता गया, उम्दा।।
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