प्रेम व अखबार का एक टुकड़ा ( 1)

डॉ.अनुराधा शर्मा

प्रेम व अखबार का एक टुकड़ा ( 1)
(18)
पाठक संख्या − 2010
पढ़िए

सारांश

प्रेम करने की नहीं होने की चीज़ है ।इसी कारण अक्सर ये वहां उपज जाता है जहां कायदे से नहीं उपजना चाहिए । और इसी कारण जीवन में अक्सर ही ऐसी विसंगतियाँ उपज जाती है कि जिन्दगी संभालनी मुश्किल हो जाती है ...और इंसान के पास सिर्फ एक ही रास्ता बचता है और वह है खुदकुशी ..!
Vaibhavi Sharma
कितनी कमजोर हो जाती है स्त्री प्रेम में पड़कर😭
Shweta Mishra (preety)
दिख को छू गई ये कहानी
Bablu kumar Yadav
बहुत सुंदर👌🙏🏽
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mukesh nagar
बेहतरीन कहानी का सुंदर लेखन....अगली कड़ी का इंतजार रहेगा।
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मनमोहन भाटिया
अगले अंक की प्रतीक्षा है
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Deepak Dixit
भावनाओं का सुंदर प्रतिबिम्बन
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मुकुल सिंह
देखें आगे क्या होता है
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Mahesh Sharma
सार्थक संदेश देती कहानी..?
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