प्रेम या विश्वास घात?

Vandana Prasad

प्रेम या विश्वास घात?
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सारांश

शाम का समय १२ अगस्त२०१८ सुगंधा का करूण क्रंदन पूरे घर में गूँज रहा था। आज उसे ऐसा लग रहा था की उसकी इस असहनीय पीड़ा का कोई अंत ही नहीं है। ऐसा प्रतीत हो रहा था की आजतक वो किसी मृगमरीचिका में अपने ...
Asha Shukla
बेहद खूबसूरत और शानदार कहानी,,,,,👌👌💐💐💐💐💐💐
Jitendra Kumar
bahut hi sacchi kahane hai
R Mohan Parnami
बहुत ही बेजोड़ कहानी बहुत सुंदर अभिव्यक्ति।
Rajiv Sarkar
Very touchy and sensitive as if the author has gone through whatever she wrote and explained in a very organised way. Directly from the core of heart 💔. There’s a perfect balance of feelings, emotions, sentiments with following empathetic approach in motivating readers to correlate oneself. Just awesome and praiseworthy effort by the writer. All the very best..!
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Nitin Mishra
bohot shubhkamnaye Vandana ji
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करन त्रिपाठी
मार्मिक, हृदयस्पर्शी, बेशक शानदार लेखन शैली......🙏🙏
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Navin Bairwa
बहुत ही शानदार लेख, पढ़कर काफी अच्छा प्रतीत हुआ। लगा कि प्रेम कोई खेल नही, एक जिम्मेदारी के साथ साथी का विश्वास भी है।
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Richa Chugh
बेहतरीन तरीके से एक बहुत मार्मिक दास्तां ब्यान की हैं
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Alok Rathaur
So awesome 🌹🌷💐👌❤️🙏
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Suresh Thakur
बहुत ही सुन्दर लेख प्रस्तुत किया है जी आपने और बहुत ही अछा संदेश भी है अब इसे किस्मत की मार बताना तो झूठ बोलना ही होगा (और) यह कहना बिलकुल भी गलत नहीं होगा की ऐसा व्यक्ति गैर जिम्मेदार बेटा, पति ,पिता बगैरा 2 और 420 फरौड ही कैहलाएगा
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