प्रेम या प्रायश्चित

Shobhna Goyal

प्रेम या प्रायश्चित
(100)
पाठक संख्या − 16258
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सारांश

प्रेम तो सच्चा होता ही है पर साथ मे प्रायश्चित भी जुड़ जाए तो' सोने में सुहागा ' हो जाता है
Sangita Rathore
osam
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Chourasiya brajesh
सुन्दर भावनाओं से ओतप्रेत रचना ,,,,
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Blogger Akanksha SAXENA
बेहतरीन सचमुच
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Sirajuddin Sirajuddin
बहुत ही भावपूर्ण व समर्पण वाली प्रेम कहानी
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Poonam Kaparwan
sahanubhuti thy naayak ki pream alag h yaha. kai baar ensaan jo nahi karna chahata krnna padta h fir eswar ke ghar se hi jodi banti h .beautiful story .
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Archana Khare
इस कहानी से पढ़ कर ये महसूस हुआ कि अनूप ने अपने जीवन में विभा को शून्य पर रखा,क्योंकि जहाँ विभा और अनूप ने जीवन साथ जीने की कसमें खाई थी तो क्या अनूप के जीवन में छोटी बडी़ बातों का भी पता विभा को नही होना चाहिए ।और शादी जैसा मुद्दा छोटी बात नही थी उसके बारे में अनूप को एक बार तो चर्चा करनी ही चाहिए,लेकिन अनूप ने केवल प्रयाश्चित आवरण में स्वार्थ का खोल पहना हुआ था।और विभा का प्यार सच्चा था जो अनूप के स्वार्थ में प्रयाश्चित दिखा।लेकिन विभा के प्रति जो अनूप ने छल किया उसका प्रयाश्चित कैसे करेगा अनूप ?
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sushma gupta
प्रायश्चित नहीं ये इंसानियत भरी सोच और प्रेम की पवित्रता थी कि विभा ने अनूप की भावनाओं का सम्मान किया, प्रेम को दैहिक से दैविक बना दिया, बहुत सुन्दर रचना 👌👌👌👌🌹🌹🌹🌹💞
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Sheetal Gujarathi
good story
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Sangeeta Vyas
very nice and 💜❤ touching story
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