प्रेम परीक्षा

डॉ ज्योत्स्ना गुप्ता

प्रेम परीक्षा
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सारांश

फ़िरोज़ तुम सुन रहे हो न... मेरी जान निकली जा रही है, । तुम्हे या तुम्हारे परिवार को मैं स्वीकार तो होऊँगी...??? कैसे रिएक्ट करेंगे वो सब मुझे देखकर ।देखो मैं जैसी हूँ वैसी ही रहूँगी.... प्रेम में ...
Arun Kumar Manglam
इतिहास साक्षी है कि प्रेम की परीक्षा आदि काल से होती आयी है। इसके लिए कई धार्मिक एवं अन्य ग्रंथ उपलब्ध हैं जिसमें इसका विस्तृत विवरण देखा जा सकता है। आपने दो धर्मों जिनके बीच एक कथित दीवार धर्म के ठेकेदारों ने बना दिया है उसका उदाहरण संदर्भ के साथ रखा है यह काबीले तारीफ है। मानवता का धर्म ही सर्वोपरि है आपकी कहानी अपने पात्रों के माध्‍यम से इसे साबित करती है। धन्यवाद।
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Damini
बहुत ही खूबसूरत कहानी है आपकी।
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अनामिका गुप्ता
अच्छा प्रयास है।लोगों को उनकी सोच के दायरे से बाहर निकाल कर इंसानियत प्रेम त्याग का अच्छा पाठ पढ़ाया है आपने।वक़्त की जरूरत के अनुसार इंसानों को खुद में बदलाव कर ही लेने चाहिए।प्रकाशवान रचना।बधाई हो, धन्यवाद,,🙏
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Parikrama Prasad
बहुत ही खूब लिखा है
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Nidhi shukla
very nice story
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Sushma Gupta
सुन्दर
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Mamta Shalu
bahut acche
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dushyant kashyap
अविस्मरणीय
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Pavan Kumar Mishra
Good
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Prabha Srivastav
bahut kub likha h
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