।। प्रेम गीता।। अध्याय ३४

चंद्रकांत पवार

।। प्रेम गीता।।  अध्याय ३४
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सारांश

प्रेमसखी अथवा प्रेमसखा।  हृदयभेटी सारखा जीवन गुपितं उघड होती। प्रेम शांशकता निघून जाती ।।१।। निर्धास्त आणि बिनधास्त ।जीवन गुजगोष्टी समस्त प्रेमावस्था सम्पूर्ण भक्ती ।अनामिक पूर्तता प्रेम शक्ती ।।२ ...
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