प्रेम का दुष्प्रभाव ( सम्पूर्ण )

मनोज वेदप्रकाश पांडेय

प्रेम का दुष्प्रभाव ( सम्पूर्ण )
(18)
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सारांश

श्रीमान गुलशन टंडन जी, यह नाम कौन नहीं जानता पूरे छतरपुर जिले में, खजुराहो क्षेत्र के थाने में हवलदार के पद पर कार्यरत, मजाल है कोई उनके द्वारा बताये कानून और ज्ञान को काट दे, गुस्सा हर समय इनके साथ ...
Seema Thakur
कहानी की शुरुआत और मध्य अच्छा है लेकिन अंत थोड़ी सी जल्दबाजी में कर दिया। ललिता को मौका भी नहीं दिया गया। वैसे गलती ललिता की ही थी,जब एक बार इतनी बदनामी हो चुकी थी तो सब कुछ जानते हुए निशा से दोस्ती रखने का क्या तुक बनता था।अपाहिजों की तरह व्यवहार करने का यही परिणाम होता है। निशा उसे घर से झूठ बोल कर ले आई,बाईक पर बैठा कर ले गई(कार में तो जबरदस्ती भी बैठाया जा सकता है,बाइक पर नहीं) खंडहर में अपने प्रेमी से मिलती है, रोज़ प्रेमी बदलती है,कालिज में बदनाम है,,,,, बावजूद इसके कमअक्ल ललिता उससे सख्ती से पीछा नहीं छुड़ा पाई। गलती ललिता की ही ज्यादा है।
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BK KUMAR
prem ko lekar ajkak ke yuvao ki soch ko dikhati kahani
Somesh Ârmo
बिल्कुल सटीक शीर्षकानुसार 👌👌👍
Vidya Sharma
bdi khobsurati se rahi gyi khani.. bhawanao or risto ka uchit smanwyn
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