प्राणांत

दीपक शर्मा

प्राणांत
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सारांश

“डेथ हैज़ अ थाउज़ंड डोरज़ टू लेट आउट लाइफ/आए शैल फाइंड वन.....” --एमिली डिकिन्सन “तुम आ गईं, जीजी?” नर्सिंग होम के उस कमरे में बाबूजी के बिस्तर की बगल में बैठा भाई मुझे देखते ही अपनी कुर्सी से उठ खड़ा ...
स नारंग
बेहद ख़ूबसूरत लिखा है आपने,कहीं आप बीती महसूस हुई
Rajesh Sehgal
दिलको छू लिया
Manisha Jain
operation ke naam par itna bhay kyun, ye kuchh clear nahi hua.
Dubey Mrinalika
अद्भुत जीवंत चित्रण
saurabh
कवि ह्रदय कहानी
Pragya Bajpai
मार्मिक ।
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