प्राणांत

दीपक शर्मा

प्राणांत
(198)
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सारांश

“डेथ हैज़ अ थाउज़ंड डोरज़ टू लेट आउट लाइफ/आए शैल फाइंड वन.....” --एमिली डिकिन्सन “तुम आ गईं, जीजी?” नर्सिंग होम के उस कमरे में बाबूजी के बिस्तर की बगल में बैठा भाई मुझे देखते ही अपनी कुर्सी से उठ खड़ा ...
saurabh
कवि ह्रदय कहानी
Pragya Bajpai
मार्मिक ।
Sudha Tanwar
अत्यंत भावुक रचना,बेटियाँ सदा ऐसी ही होती हैं
Chhaya Srivastava
गहन संवेदना से भरी दिल को छूने वाली कहानी।अपने तो जैसे मुझे कई साल पहले के दिनों में ला कर खड़ा कर दिया।
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