प्यार( जिंदगी की हद से पार)

स्वाति

प्यार( जिंदगी की हद से पार)
(62)
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सारांश

"मैं जानता हूँ अगर मैं नही रहा तो ये खिलखिलाना छोड़ देगी और न ही मदमस्त हवाओ के साथ झूमेगी सुबह तो होगी हर रात की पर शायद आज के बाद से इसकी सुबह न होगी ये सूरज की पहली किरण के साथ न उठेगी और न ही हर रोज की तरह निस्वार्थ होकर लोगो की सेवा करेगी ।"
Vandana Baranwal
wow 👌👌👌👌👌👌👌👌
Akela musafir ...🚶
bhut achi Rachana na thi or ek asa ahesas bhi ke life me har ek ki jarurat ha Che koi bhi ho thanx to u mam ....g
Daya Kushwaha
अच्छी सुंदर कहानी
gaurav Singh
apka andaz boht anokha hai
Sushiela Jarodia
बहुत सुन्दर
पल्लवी राय
वाह,बहुत बेहतरीन👌
बाल व्यास आराधना चतुर्वेदी
एक सुंदर कहानी जो हमें मानव की श्रृंखला में खड़ा करने का प्रयास करती है और हमारी जिम्मेदारियों का एहसास कराती है। आज हर व्यक्ति के मन मे ऐसा प्यार जागृत हो जाय तो फिर बहुत सी समस्याओं का हल स्वतः मिल जाएगा। अति सुंदर अभिव्यक्ति।
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