""पैसा तेरी तिखी धार""

bhagirath choudhary

(34)
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सारांश

पैसो के लिए बिना सोचे समझे मनुष्य गलत दिशा मे जा रहा हैं।
Sunita Dev
nice
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प्रभु दयाल मंढइया
बन्धुवर श्री भागीरथ चौधरी जी,बहुत-बहुत बधाई और साधुवाद। कविता हो या गद्ध रचना आपने दोनों में अपनी संवेदनशीलता तथा आत्मीयता का भरपूर चित्रण किया है।दिल से प्यार करने वाले व्यक्ति बहुत संवेदनशील और भावुक होते हैं। आपकी सभी रचनाएं मैंने पढी हैं जिनमें प्यार और भावुकता की ही प्रधानता है। प्यार से संसार को जीता जा सकता है।रचना पोस्ट करके एक बार उसे पढ अवश्य लें यदि कहीं कोई मात्रा या शब्द गलत तो नहीं छप गया है।पढ लेने से भूल सुधधार का मौका मिल जाता है।यह मेरा विनम्र सुझाव है।कृपया अन्यथा न लें। शुभकामनाएं।
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डॉ. प्रदीप कुमार शर्मा
लाजवाब प्रस्तुति
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Nutan Varma
beautiful poem
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Pink Ajmara
अच्छे वर्ण
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Hima Das
बहुत सुन्दर प्रस्तुति
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Nitu Raj
बढ़िया लेखन
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Raju Bhai
पैसा पैसा मर जाएगी साली पूरी दुनिया
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