पूर्वाभास

निधि श्री

पूर्वाभास
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सारांश

सरसराती हवा और तेज़ बारिश में जहाँ सब अपने अपने घरों में घुस गए थे.. मैं इसी बगीचे में बैठ के तुम्हारे आने का इंतेज़ार कर रही थी.. उस शाम तुम ने मिलने का वादा किया था..उस वक़्त मौसम अपने पूरे मिजाज़ में थ
kavita chaudhary
ऐसा होता है मैम
Usha Garg
ऐसा कई लोगो के साथ होता है
Amit Suryavanshi
मस्त कहानी..दोस्तों इमली का प्रेत भी पढें
CHETANA SHUKLA
my God , Really aesa hi hota h.
Pawan Pandey
बहुत ही अच्छी रचना।
Nick
अच्छी कहानी है और आपकी शैली अच्छी लगी। भविष्य के लिए शुभकामनाएं।
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