पूर्वाभास

निधि श्री

पूर्वाभास
(183)
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सारांश

सरसराती हवा और तेज़ बारिश में जहाँ सब अपने अपने घरों में घुस गए थे.. मैं इसी बगीचे में बैठ के तुम्हारे आने का इंतेज़ार कर रही थी.. उस शाम तुम ने मिलने का वादा किया था..उस वक़्त मौसम अपने पूरे मिजाज़ में ...
अमित कुमार
दिल को छूने वाली रचना
Vijay Kumar
अच्छी शब्द संरचना भावी शुभकामनाएं.
अनन्त सहाय
Amazingly written short story. Well done
डॉ.रमाकांत द्विवेदी
muje bhi hota hai पूर्वाभास it is करेक्ट
कविता चौधरी
ऐसा होता है मैम
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Usha Garg
ऐसा कई लोगो के साथ होता है
Amit Suryavanshi
मस्त कहानी..दोस्तों इमली का प्रेत भी पढें
CHETANA SHUKLA
my God , Really aesa hi hota h.
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