पुरुष

खुशबू शर्मा

पुरुष
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पाठक संख्या − 741
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Ajay Nidaan
सार्थक लिखा आपने पुरुष के बारे पिता होने का फर्ज निभाते निभाते वह इतना तन्हा हों जाता हैं ।बखूबी आपने अच्छा लिखा है।
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ईश्वरसिंह बिष्ट
सशक्त अभिव्यक्ति । सार्थक विचार । परिवार के लिए जो मेहनत की है उसका सम्मान होना चाहिए । जो करने से चूक गए उसके लिए मरहम से भरे शब्द हों। हार्दिक बधाई ।
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Ankit Maharshi
अत्यंत ही सधे शब्दों में लिखा गया लेख।इससे पहले मैंने कुछ स्त्रीवादी लेखको को पुरुषों को कोसते हुए पढ़ा है, ओर शायद उनका लिखना सही भी है। पर आपने पुरुष के उजले स्वरूप का दर्शन करवाया है। सचमुच ऐसे लेख दुर्लभ है।
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विवेक गर्ग
जितना त्याग पिता करता है अपनो के लिए शायद कोई और नहीं। ये वो दर्द है जिस दर्द से पुरुष ख़ुद अनजान है, लेकिन आपने अपने कलम रूपी इस आवाज़ से मुझे और बाकी लोगो को इस दर्द से अबगत कराया। ये बड़ा सराहनीय लेख है।
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बृजभूषण खरे
बहुत सुन्दर रचना
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Manish Pandey 'Rudra'
आपने पुरुषों के प्रति अपने नजरिये को भाषा में बाँधने की बहुत खूबसूरत कोशिश की है और वाकई यह काबिले तारीफ है बस आपको अपनी शैली को थोड़ा और खूबसूरत बनाने की जरुरत है जैसे किसी खूबसूरत और खुशबूदार पकवान पर गार्निंशिंग करने जैसा.... उम्मीद है आगे आप और भी बेहतर करेंगी।
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Rupali Shah
nyc
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Sadiya shameem
Kmal ki sonch h apki
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Bhavesh Kumar Joya
Bs jyada kuchh nahin kahunga kee Yaha par to sirf 5 star hee he ap ko to man karta he 10000000 star dene ko dhanyvaad🙏🙏🙏🙏
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Amar Choudhary
बहुत ही गहरा अनुभव। नमन आपके विचारों को।
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