पुत्रवधु

Neha Sharma

पुत्रवधु
(23)
पाठक संख्या − 550
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सारांश

ट्रिंग,ट्रिंग,ट्रिंग। फोन की घंटी बजती है। फोन से आवाज आती है- हैलो, पिताजी मैं सुयश बोल रहा हूं। अब आपकी तबीयत कैसी हैं? आप दवा तो वक्त पर खाते हैं ना। और मां के घुटने का दर्द कैसा हैं? माता-पिता के ...
brajmohan pandey
पुत्रवधु मे ससुराल के प्रति जो भावना है ,सराहनीय है।
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sanjita
अच्छी कहानी है
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Arunima Thakur
good story
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Neha Vyas
Sundar Seekh Neha Ji 🌷😊
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amit verma
बेहतरीन रचना
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Minni Mishra
बहुत बढ़िया
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Jitendra Moslapuriya
बहुत खूबसूरत रचना है, इस रचना ने बहुत कुछ सीखा दिया।
Satya Prakash
बहुत बहुत बहुत बढ़िया, 🙏🙏🙏
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अजय अमिताभ सुमन
वाकई बहुत खुबसूरत कहानी है। भगवान ऐसी पुत्रवधु सबको प्रदान करे।
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