पिता के कंधे से टिककर / अर्पण कुमार

अर्पण कुमार

पिता के कंधे से टिककर / अर्पण कुमार
(10)
पाठक संख्या − 219
पढ़िए

सारांश

पिता के कंधे से टिककर अर्पण कुमार एक पिता के कंधे से लगकर मुझे मेरा बचपन याद आया तब ये कंधे इस तरह कमजोर नहीं थे बेतहाशा भीड़ में इन्हीं कंधों पर चढ़कर मैं रावण दहन देखा करती थी उम्र के साथ मेरे जीवन ...
talent fresh
बहुत ही भावना और कुशल काव्य
इला सिंह
वाह ,सुन्दर
hindi@pratilipi.com
080 41710149
सोशल मीडिया पर हमें फॉलो करें।
     

हमारे बारे में
हमारे साथ काम करें
गोपनीयता नीति
सेवा की शर्तें
© 2017 Nasadiya Tech. Pvt. Ltd.