पिंजरे में सपने

Anjali Mishra

पिंजरे में सपने
(41)
पाठक संख्या − 4031
पढ़िए

सारांश

आज उसके उल्लास का कोई ठिकाना नहीं था।बड़की ठकुराईन ने कल ही पूरे महीने की पगार दे दी।देते समय पाँच सौ का एक नोट भी जबर्दस्ती रख दिया" कमलिया की माय हमसे पर्दा रख कर क्या करोगी।तुम्हारी कौन सी मजबूरी ...
Madhu Sharma
अच्छी कहानी लगी
रिप्लाय
Dr. Deepa agrawal
Majburi jo na kraye ...wo kam h
रिप्लाय
सरोज वर्मा
nice story
रिप्लाय
Namita Gupta
भावनाओं की खूबसूरत अभिव्यक्ति
रिप्लाय
विजय कुमार तिवारी
aap ki bhasha aur shaily bahut sunder hai ji..
रिप्लाय
Dr Kamal Satyarthi
यदि यह विवाह टूट जाता तो कहानी सही रहती|कमलिया पडलिरव कर कुछ बन जाती तो सही रहता|
रिप्लाय
mukesh nagar
कमाल का लिखती हैं आप...बनारस-बिहार का भोलापन और मिठास भरी है रचना में।👍👌👌
रिप्लाय
Rupak Kumar
Nice Story, n waiting for your next story.
रिप्लाय
सारी टिप्पणियाँ देखें
hindi@pratilipi.com
080 41710149
सोशल मीडिया पर हमें फॉलो करें।
     

हमारे बारे में
हमारे साथ काम करें
गोपनीयता नीति
सेवा की शर्तें
© 2017 Nasadiya Tech. Pvt. Ltd.