पास तक फ़ासले

कमलानाथ

पास तक फ़ासले
(116)
पाठक संख्या − 12537
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सारांश

पास तक फ़ासले यह कहानी है एक शादीशुदा नव-यौवना की जो अपने जीवन में अचानक आई परिस्थितियों से सहसा पशोपेश में पड़ जाती है. एक है बाँका जवान, जो लौटते वक़्त हर शाम गाँव से गुज़रता है और थोड़ी देर बैठ कर अलगोज़ा पर मधुर धुनें बजाते हुए सुस्ताता है. वे एक दूसरे को पसंद करते हैं, पर सामाजिक व्यवस्था उनकी नज़दीकियों को फ़िलवक़्त स्वीकार करने के लिए आगे बढ़ी नहीं है. क्या वह अपने भविष्य के बारे में खुद निर्णय ले पाएगी या समाज का बंधन उसे बार बार सोचने पर मजबूर करता रहेगा?
Vishakha
plz complete ur story.... 😊
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Promila Thakur
सारे इंसानों को ऐसे ही होना चाहिए
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Krittika Chatterjee
Awesome
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प्रदीप दरक
उत्तम, राजस्थानी भाषा शैली अति उत्तम
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