पास तक फ़ासले

कमलानाथ

पास तक फ़ासले
(107)
पाठक संख्या − 12153
पढ़िए

सारांश

पास तक फ़ासले यह कहानी है एक शादीशुदा नव-यौवना की जो अपने जीवन में अचानक आई परिस्थितियों से सहसा पशोपेश में पड़ जाती है. एक है बाँका जवान, जो लौटते वक़्त हर शाम गाँव से गुज़रता है और थोड़ी देर बैठ कर अलगोज़ा पर मधुर धुनें बजाते हुए सुस्ताता है. वे एक दूसरे को पसंद करते हैं, पर सामाजिक व्यवस्था उनकी नज़दीकियों को फ़िलवक़्त स्वीकार करने के लिए आगे बढ़ी नहीं है. क्या वह अपने भविष्य के बारे में खुद निर्णय ले पाएगी या समाज का बंधन उसे बार बार सोचने पर मजबूर करता रहेगा?
Vishakha
plz complete ur story.... 😊
Promila Thakur
सारे इंसानों को ऐसे ही होना चाहिए
प्रदीप दरक
उत्तम, राजस्थानी भाषा शैली अति उत्तम
सारी टिप्पणियाँ देखें
hindi@pratilipi.com
080 41710149
सोशल मीडिया पर हमें फॉलो करें।
     

हमारे बारे में
हमारे साथ काम करें
गोपनीयता नीति
सेवा की शर्तें
© 2017 Nasadiya Tech. Pvt. Ltd.