पापा

संजना तिवारी

पापा
(30)
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सारांश

पापा ,बहुत सालों बाद ये “ पापा” शब्द आपसे मुखातिब होकर पुकार रही हूँ । कैसे हैं आप ??ये प्रश्न पूछना आज मेरे लिये कितना असहनीय हो गया है , अब मैं केवल ये सोच सकती हूँ की कैसे होगें आप ? और ये प्रश्न अ
Kapil Tiwari
पापा कहीं भी हैं,खुश रहे। और कुछ लिखने का साहस नही है।
और्व विशाल
बहुत प्यारी रचना
डॉ. ए सतीश
नमन 🙏ये सच्चे अनुभव लिखना सबके बस का नही
Rashmi Singh
लगताहै जैसे मेरी जीवन की कहानी है।मेरे पापा का निधन हुआ था और मुझे जाने नही दिया गया था।
Tara Gupta
भवनारत कहानी जो अंत तक बांधे रखती है। बहुत सुंदर।
anshika
bhaut achi lagi story. .. nice
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