पापा मैं सोयी नहीं थी

रिवेश प्रताप सिंह

पापा मैं सोयी नहीं थी
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सारांश

"नेहा, तुम्हारे पापा का फोन आया था। तुम्हें मिलने के लिए बुलाया हैं।" "मुझे बुलाया है पापा ने !जरुर पापा की तबियत ठीक नहीं होगी। जरा फोन लगाइए तो पापा को!" नेहा ने दुपट्टे से अपना मुंह पोछते हुए पति ...
राजेश सिन्हा
पिता एवं पुत्री का रिश्तो को बहुत ही मार्मिकता से दर्शाया है आपने। पिता ही वो संबल है जो बेटी के आने वाले भविष्य की नींव रखता है।
Anupam Shukla
पिता और पुत्री के प्यार की बहुत ही हृदय स्पर्शी कहानी है। अच्छी लगी।
Sona meena
Sir kin sabdo me apki story ki samiksha karu kar hi ni skti. cz apne ek beti aur baap k rishte me jo dar, bhaavnaye, utar chadav hote h bakhoobi darshaye hai. Sach kahu to lga jese character ne apne papa ko kho diya to meri khud ki aankho se aanshu bah nikle. Sach kahu to mjhe bhi mera khilona meri jaan se jyada pyara hai. unhe thoda sa bhi kch tklif hoti h naa to ghabara hi jati hu bhut...Thnx aisi story k liye🤗🤗
Raj Bhalla
रुला दिया आपने। अत्यंत मार्मिक व हृदय सरफ़रोशी रचना।
Arati Singh
Sahi kahate. H papa ke bina to duniya adhuri hi hoti. H
prachi
marmik khani. dil ko chhu gai
Anjali Joshi
बहुत सुंदर भावनात्मक कहानी , पिता और पुत्री के रिश्ते जैसी ही
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