पहली कविता

अमित कुमार मल्ल

पहली  कविता
(85)
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सारांश

लहुलुहान हूँ मैंघायल आत्मा हैचीत्कार तड़प रही हैधरती से आसमां तककिन्तु मैं हारा नहीं हूँ ।फूटती हैं बिजलियाँकंपकंपाते हैं बाजूटूट गए है बाणधूल धूसरित हो गयी है उम्मीदेंकिन्तु धड़क रहा हूँऔर धड़क
sachin sourav
Full of truth and reality
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Pooja Singh
very touching and beautiful poetry        
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Neeta
It was a great poem . It is hard to pick out one stanza as the whole poem is well written . A must read poem. 
Anita uniyal
Very inspirational n motivating poem..  
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