परिंदे...

अभिधा शर्मा

परिंदे...
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सारांश

रोज़मर्रा के अपने काम में व्यस्त धरा ने बहुत बार रिंग होने पर कॉल रिसीव किया,दूसरी ओर से मयंक की आवाज़ आई- "मैंने तो सुना था कि सगाई के बाद लड़कियाँ सारा दिन अपने होने वाले पति को मिस कॉल देती हैं और ...
Neerja SONI
बेहद खूबसूरत रचना है.. आपको एक बार फिर शुक्रिया अभिधा जी...
Arun Saini
कैनवास पर बिखरे यादों के रंग के बाद मैने आपकी ये कहानी पढ़ी। बहुत अच्छी प्रेम कहानियां लिखती है आप। सबसे अच्छी बात है उनका सुखद अन्त। कहानी का शीर्षक बहुत अच्छा है परिंदे। इंसान हो या परिंदे जब शाम को थके हारे घर जाते है उसमे जो सुकून मिलता है वही सुकून आपकी कहानी के अन्त मे मिलता है। बहुत बहुत आभार ऐसे कथालेखन के लिए।
ऋतु श्रीवास्तव
कश्मीरी पंडितों के बारे में सुना तो था पर कभी ध्यान नहीं दिया आज भी ना जाने ऐसे कितने तथ्य है जिनके बारे में लोग ज्यादा नहीं जानते शुक्रिया ऐसे विषयों पर लिखनेँ के लिए।
Pranav Kaushik
यथार्थ को कहानी के धागों में पिरोने की कला की जादूगरनी। प्रतिलिपि पर पढ़ी गई मेरी आजतक की सर्वश्रेष्ठ रचना।
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Dr. Santosh Chahar
अद्भुत लेखनी। आपसे बहुत कुछ सीखने को मिलेगा।बधाई।
Kiran Ahir
bahat khub Likha hai Apne
Manraman Tyagi
लाजवाब 👍👍👌👌💐💐, आगामी रचनाओ के लिए शुभकामनाएं।
Geeta Rawat
one of the best...👌👌
अविका त्यागी
खुशनसीब होते है वे परिंदे जिनको उनका घर मिल जाता है लेकिन सबके नसीब में ये नही होता,,आपकी कहानी की खाश बात है कि इनमें पढ़ाई वाली किताब भी मिलती है जिनके बारे में पढ़ कर सुकून मिलता है ,ओर संविधान की प्रस्तावना पर अम्बर की स्पीच एकदम सही थी बहुत पसंद आई ,,धन्यवाद ।
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