न हुई गर मेरे मरने से तसल्ली न सही

मिर्ज़ा ग़ालिब

न हुई गर मेरे मरने से तसल्ली न सही
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दीपिका पाण्डेय
सितम ढाए ग़र ज़माने ने रूह समेटे हुए बा खु़दा। "क्षिर्ज़ा "ए मोहब्बत भी है कुछ कम नहीं।। 🙂 उत्तम।।
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