नोरा

रंजना जायसवाल

नोरा
(44)
पाठक संख्या − 7784
पढ़िए

सारांश

दरवाजे की घंटी बजते ही नोरा ने लपक कर दरवाजा खोल दिया। वह देर से विवेक का इंतजार कर रही थी, उसके साथ खान साहब भी आने वाले थे। दरवाजे पर विवेक के साथ एक बेहद दुबला-पतला, लम्बा, गौर वर्ण का लगभग 28 ...
Kajal Bagoriya
bhut dm h aapki lekhni me pr pls aduea mt chodiye
Bhakti Agrawal
Kahani achchhi chal rahi thi.. achanak se khatam ho gayi to nirasha huyi...aage kya huaa??
रिप्लाय
रविन्द्र
पूरा अंश न सही।लघु भाग बनाकर लिखा जा सकता था जैसे दूसरे लेखकगण करते हैं।
Usha Garg
अच्छी है पर अधूरी है
रिप्लाय
Er Neha Parveen
how can i read it online
Chitrapriya Ganguly
अच्छी कहानी पर पूरी नहीं
रिप्लाय
saba
बहुत सुंदर
sheela vishwakarma
मिस मैं आप की जितनी भी रचनाएँ अभी तक पढ़ी हूँ जिसमें ".. और मेघ बरसते रहें.." समाज के यथार्थ को दर्शाता है, जो हमें सोचने के लिए विवश कर देता है। या उन पहलुओं को दर्शाता है जिसे हम देख कर अनजान बने बैठें हैं। आप की लेखनी के तारीफ के लिए मेरे पास शब्द ही नहीं हैं ।
रिप्लाय
Suryaa Shukla
pura upanyaas kaha padhne mil sakta hai?
रिप्लाय
Mamta Gupta
aage ki rachna kab tak pad payege plz ... nyc story
रिप्लाय
सारी टिप्पणियाँ देखें
hindi@pratilipi.com
080 41710149
सोशल मीडिया पर हमें फॉलो करें।
     

हमारे बारे में
हमारे साथ काम करें
गोपनीयता नीति
सेवा की शर्तें
© 2017 Nasadiya Tech. Pvt. Ltd.