नैराश्य लीला

मुंशी प्रेमचंद

नैराश्य लीला
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सारांश

पंडित हृदयनाथ अयोध्याय के एक सम्मानित पुरुष थे। धनवान् तो नहीं लेकिन खाने-पीने से खुश थे। कई मकान थे, उन्हीं के किराये पर गुजर होता था। इधर किराये बढ़ गये थे, उन्होंने अपनी सवारी भी रख ली थी। बहुत ...
चौधरी साहब
मुझे उन मूर्खों पर दया और गुस्सा आता है जो मुंशी प्रेमचंद जी की रचनाओ पर भी कभी 3 स्टार कभी 2 स्टार की रेटिंग देते! अबे सालो तुम्हारा बाप तो क्या तुम्हारे दादा परदादा भी ऎसी महान रचनाए नहीं लिख सकते सालो कुत्तो!
Manisha Jain
Isko pura kyun nahi likha
Irhsek Hsuyip
हर किसी को पढ़नी चाहिए
Ashok Tripathy
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