नीड़ में नीड़ का निर्माण

मधुर कुलश्रेष्ठ

नीड़ में नीड़  का निर्माण
(58)
पाठक संख्या − 4788
पढ़िए

सारांश

ऑफिस से लौटा तो बेटी ने चहकते हुए कहा, ‘‘पापा दो लोग अपना प्लॉट देखने आए थे।’’ बेटे ने भी उसकी हाँ में हाँ मिलाई, ‘‘हाँ पापा, दो लोग अपना प्लॉट देखने आए थे।’’ में चौंक गया, प्लॉट! कौन सा प्लॉट? मन शंका-कुशंकाओ में भटकने लगा। मेरा तो कोई प्लॉट ही नहीं है। ‘‘हाँ पापा, फुदक-फुदक कर देखा दो चिड़ियों ने। अपने पोर्च में फैली मनीप्लांट के बीच बनी तिकोनी जगह पर बैठ-बैठकर मजबूती देखी। सुरक्षित जगह देखी। शायद दोनां को पसंद आ गई हमारे पोर्च की जगह। दोनों ने खुश होते हुए कहा।’’
Raj Gupta
उम्दा लेखन
Shipra Trivedee
अतुलनीय
रिप्लाय
Praveen Kumar Upadhyay
आधुनिकता और प्रकृति के बीच द्वंद्व को दर्शाती हुई ये खूबसूरत कहानी
कुसुम पारीक
सुंदर रचना जो मानवीय द्वंद और श्रेष्ठता को दर्शाती है। मानव स्वयम्भू ही रहना चाहता है लेकिन उसके दम्भ को पशु पक्षी भी समझ लेते है।सुंदर चित्रण
Archana
Bhaut sundar rachna
Sandeep Sachdeva
Thanks.... For being Human
Namita Chaudhary Sahaj
सजीव चितरण
सारी टिप्पणियाँ देखें
hindi@pratilipi.com
080 41710149
सोशल मीडिया पर हमें फॉलो करें।
     

हमारे बारे में
हमारे साथ काम करें
गोपनीयता नीति
सेवा की शर्तें
© 2017 Nasadiya Tech. Pvt. Ltd.